जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम ए जाँ बनता गया

jab hua irfaan to gam aaraam e jaan banta gaya

जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम ए जाँ बनता गया सोज़ ए जानाँ दिल में सोज़ ए दीगराँ

अब तुम को ही सावन का संदेसा नहीं बनना

ab tum ko hee savan ka sandesaa nahi banana

अब तुम को ही सावन का संदेसा नहीं बनना मुझ को भी किसी और का रस्ता नहीं बनना,

अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है

adaa hai khwab hai taskeen hai tamaasha hai

अदा है ख़्वाब है तस्कीन है तमाशा है हमारी आँख में एक शख़्स बे तहाशा है, ज़रा सी

एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ

ek vazeefa hai kisi dard ka dohraya hua

एक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ जिस की ज़द में है पहाड़ों का धुआँ आया हुआ,

रस्ते में अजब आसार मिले

raste me azab aasaar mile

रस्ते में अजब आसार मिले जूँ कोई पुराना यार मिले, जिस तरह कड़कती धूपों में दो जिस्मों को

मिट्टी की सुराही है पानी की गवाही है

mitti kee suraahi hai paani kee gawaahi hai

मिट्टी की सुराही है पानी की गवाही है उश्शाक़ नहीं हम लोग पर रंग तो काही है, हर

जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया

jab raat gaye teri yaad aayi sau tarah se jee ko bahlaya

जब रात गए तेरी याद आई सौ तरह से जी को बहलाया कभी अपने ही दिल से बातें

वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे

wo is adaa se jo aaye to kyun bhala na lage

वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे हज़ार बार मिलो फिर भी आश्ना न

तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई

teri zulfon ke bikharne ka sabab hai koi

तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई आँख कहती है तेरे दिल में तलब है कोई, आँच

किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे

kisi kali ne bhi dekha na aankh bhar ke mujhe

किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे गुज़र गई जरस ए गुल उदास कर के