जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है

junun-e-dil-na-sirf-itna-ki-ek-gul-pairahan-tak-hai

जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है क़द ओ गेसू से अपना सिलसिला

आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में

aabla-paa-koi-guzaara-tha-jo-pichhle-san-me

आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में सुर्ख़ काँटों की बहार आई है अब के बन

वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है

wo-jis-pe-tumhen-sham-e-sar-e-rah-ka-gumaan-hai

वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है वो शो’ला ए आवारा हमारी ही

सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी

sikhaayen-dast-e-talab-ko-adaa-e-babakee

सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी पयाम ए ज़ेर लबी को सला ए आम करें, ग़ुलाम

दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही

dast-e-munaeem-meri-mehnat-ka-kharidar-sahi

दस्त ए मुनइम मेरी मेहनत का ख़रीदार सही कोई दिन और मैं रुस्वा सर ए बाज़ार सही, फिर

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है

mujh-se-kaha-zibreel-e-junoon-ne-ye-bhi-vahee-e-ilaahi-hai

मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वहइ ए इलाही है मज़हब तो बस मज़हब ए

दस्त ए पुर ख़ूँ को कफ़ ए दस्त ए निगाराँ समझे

dast-e-pur-khoon-ko-kaf-e-dast-e-nigaaraan-samjhe

दस्त ए पुर ख़ूँ को कफ़ ए दस्त ए निगाराँ समझे क़त्ल गह थी जिसे हम महफ़िल ए

मेरे पीछे ये तो मुहाल है कि ज़माना गर्म ए सफ़र न हो

mere-pichhe-ye-to-muhaal-hai-ki-zamana-garm-e-safar-na-ho

मेरे पीछे ये तो मुहाल है कि ज़माना गर्म ए सफ़र न हो कि नहीं मेरा कोई नक़्श

जिस दम ये सुना है सुब्ह ए वतन महबूस फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में

jis-dam-ye-suna-hai-subh-e-watan-mahbus-fazaa-e-zindaan-me

जिस दम ये सुना है सुब्ह ए वतन महबूस फ़ज़ा ए ज़िंदाँ में जैसे कि सबा ऐ हम

हों जो सारे दस्त ओ पा हैं ख़ूँ मैं नहलाए हुए

ho-jo-saare-dast-o-paa-hain-khoon-me-nahlaaye-hue

हों जो सारे दस्त ओ पा हैं ख़ूँ मैं नहलाए हुए हम भी हैं ऐ दिल बहाराँ की