कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से
कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से ख़ुद का दिल दुखाता है ख़ुद के सवाल से,
Love Poetry
कितना नादान है वो मेरे दिल ए हाल से ख़ुद का दिल दुखाता है ख़ुद के सवाल से,
तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा मुहब्बत भी नहीं देखी, तड़पना भी नहीं देखा, नहीं
जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो हर शख़्स लगता है परेशान ज़रा देख तो लो,
जवाँ हो ख़ुश अदा हो इस लिए तारीफ़ करता हूँ हसीं हो दिलरुबा हो इस लिए तारीफ़ करता
पिछले बरस तुम साथ थे मेरे और दिसम्बर था महके हुए दिन रात थे मेरे और दिसम्बर था,
दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं वही लोग इख़्लास के पर्दे में हसद रखते
ऐ वक़्त ज़रा थम जा ये कैसी रवानी है आँखों में अभी बाक़ी एक ख्वाब ए जवानी है,
दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों मर जाइये जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों, आँखों
धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैंने देखा है कोई तो है जिसे अपने मे पलते मैंने देखा है,
आज ज़रा फुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया बंद गली के आख़िरी घर को आज फिर