होंठों पे उसके जुम्बिश ए इंकार भी नहीं

honthon pe uske jumbish

होंठों पे उसके जुम्बिश ए इंकार भी नहीं आँखों में कोई शोख़ी ए इक़रार भी नहीं, बस्ती में

ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी

gairat e ishq salamat thi ana zinda thi

ग़ैरत ए इश्क़ सलामत थी अना ज़िंदा थी वो भी दिन थे कि रह ओ रस्म ए वफ़ा

मौसम बदल गए ज़माने बदल गए

mausam badal gaye zamane

मौसम बदल गए ज़माने बदल गए लम्हों में दोस्त बरसों पुराने बदल गए, दिन भर रहे जो मेरी

सफ़र ए वफ़ा की राह में मंज़िल जफा की थी

safar e wafa ki raah men

सफ़र ए वफ़ा की राह में मंज़िल जफा की थी कागज़ का घर बना के भी ख्वाहिश हवा

बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं

baithen hai chain se

बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं,

आपकी याद आती रही रात भर

aapki yaad aati rahi raat bhar

आपकी याद आती रही रात भर चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर, गाह जलती हुई गाह बुझती हुई

बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ

be niyazi ke silsile me

बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ मैं कहाँ अब तेरे नशे में हूँ, हिज्र तेरा मुझे सताता है

देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते

dekh lete hai ab us baam ko

देख लेते हैं अब उस बाम को आते जाते ये भी आज़ार चला जाएगा जाते जाते, दिल के

मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता

milne ki tarah wo mujh se

मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस से मुक़द्दर नहीं

वो हमसफ़र था मगर उससे हम नवाई न थी

wo humsafar tha magar usse hamnawai na

वो हमसफ़र था मगर उससे हम नवाई न थी कि धूप छांव का आलम रहा जुदाई न थी,