उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा

uske najdik gam e tark e wafa

उसके नज़दीक ग़म ए तर्क ए वफ़ा कुछ भी नहीं मुतमइन ऐसा है वो जैसे हुआ कुछ भी

एक रात आती है एक रात जाती है

ek raat aati hai ek raat jaati hai

एक रात आती है एक रात जाती है गेसुओं के साए में किस को नींद आती है, सिलसिला

जाग उठेंगे दर्द पुराने ज़ख़्मों की अँगनाई में

jaag uthenge dard puraane

जाग उठेंगे दर्द पुराने ज़ख़्मों की अँगनाई में दिल की चोट उभर आएगी मत निकलो पुर्वाई में, कोयल

कोई महबूब सितमगर भी तो हो सकता है

koi mahbub sitamgar bhi

कोई महबूब सितमगर भी तो हो सकता है फूल के हाथ में खंजर भी तो हो सकता है,

इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है

ishq se jaam se barsaat se dar lagta hai

इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है यार तुम क्या हो कि हर बात से डर

वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था

wo dushman e jaan jaan se pyara

वो दुश्मन ए जाँ जान से प्यारा भी कभी था अब किस से कहें कोई हमारा भी कभी

इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो

is naaz is andaz se tum haaye

इस नाज़ इस अंदाज़ से तुम हाए चलो हो रोज़ एक ग़ज़ल हमसे कहलवाए चलो हो, रखना है

वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद

wo dard wo wafa

वो दर्द वो वफ़ा वो मुहब्बत तमाम शुद लिए दिल में तेरे क़ुर्ब की हसरत तमाम शुद, ये

जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो

jab bhi tum chaaho mujhe

जब भी तुम चाहों मुझे ज़ख्म नया देते रहो बाद में फिर मुझे सहने की दुआ देते रहो,

सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई

sau baar chaman mahka sau

सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तन्हाई, एक लहज़ा