जाने क्यूँ बर्बाद होना चाहता है

जाने क्यूँ बर्बाद होना

जाने क्यूँ बर्बाद होना चाहता है सूरत ए फ़रहाद होना चाहता है, ज़ेहन से आख़िर में अब थक

मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो

मेरे लबों पे उसी

मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो जो चाहता है मेरे सामने गिलास न हो, ये

जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी

जब मेरे होंठों पे

जब मेरे होंठों पे मेरी तिश्नगी रह जाएगी तेरी आँखों में भी थोड़ी सी नमी रह जाएगी, सरफिरा

ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया

ग़म इसका कुछ नहीं

ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया ग़म ये है कि क़ातिलों में तेरा नाम

दिल के लूट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं

दिल के लूट जाने

दिल के लूट जाने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं ये तमाशा सर ए बाज़ार ज़रूरी तो नहीं, मुझे

हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर

हमारे सब्र के दामन

हमारे सब्र के दामन को तार तार न कर निगाह ए जोक तलब इतना बे क़रार न कर,

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात

मेरी मुहब्बत मेरे जज़्बात सिर्फ़ तुम से हैं मेरे हमदम मेरी क़ायनात सिर्फ तुम से हैं, गैर महरम

यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो

यारो किसी क़ातिल से

यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो अपने ही गले के लिए तलवार न माँगो, गिर जाओगे

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं

यूँ तो आपस में

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं ?

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

मेरे जैसे बन जाओगे

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा,