चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया
चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया इश्क़ के इस सफ़र ने तो मुझ को निढाल कर
Love Poetry
चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया इश्क़ के इस सफ़र ने तो मुझ को निढाल कर
कू ब कू फैल गई बात शनासाई की उसने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की, कैसे कह दूँ
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता
अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें हम उन के लिए ज़िंदगानी लुटा दें, हर एक मोड़ पर
इश्क़ में ग़ैरत ए जज़्बात ने रोने न दिया वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न
सज़ा पे छोड़ दिया कुछ जज़ा पे छोड़ दिया हर एक काम को मैं ने ख़ुदा पे छोड़
तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी ये तेरी तरह मुझ से तो शरमा न सकेगी, मैं बात
काश ! एक तो ख्वाइश पूरी हो मेरी इबादत के बगैर वो मुझे अपने गले से लगाए मेरी
मेरी एक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए,
अकेले छोड़ जाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते हमारा दिल दुखाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते,