अब ख़ाक तो किया है दिल को जला जला कर
अब ख़ाक तो किया है दिल को जला जला कर करते हो इतनी बातें क्यूँ तुम बना बना
Love Poetry
अब ख़ाक तो किया है दिल को जला जला कर करते हो इतनी बातें क्यूँ तुम बना बना
मुकम्मल मोहब्बत का दस्तूर देखा यहीं सारी दुनिया को मजबूर देखा, हर एक सम्त मैंने नया तूर देखा
मुश्किल है पता चलना क़िस्सों से मोहब्बत का अंदाज़ा मुसीबत में होता है मुसीबत का, है नज़अ के
है आम अज़ल ही से फ़ैज़ान मोहब्बत का इम्कान मुसल्लम है इम्कान मोहब्बत का, तोड़ा नहीं जा सकता
कर्ब चेहरे से मह ओ साल का धोया जाए आज फ़ुर्सत से कहीं बैठ के रोया जाए, फिर
तुम से मिलते ही बिछड़ने के वसीले हो गए दिल मिले तो जान के दुश्मन क़बीले हो गए,
हालत ए हाल के सबब हालत ए हाल ही गई शौक़ में कुछ नहीं गया शौक़ की ज़िंदगी
तुम आए हो न शब ए इंतिज़ार गुज़री है तलाश में है सहर बार बार गुज़री है, जुनूँ
बे क़रारी सी बे क़रारी है वस्ल है और फ़िराक़ तारी है, जो गुज़ारी न जा सकी हम
गुलाबी होंठों पे मुस्कराहट सजा के मिलते तो बात बनती, वो चाँद चेहरे से काली ज़ुल्फें हटा के