मोहब्बत ना समझ होती है समझाना ज़रूरी है

mohabbat na samajh hoti

मोहब्बत ना समझ होती है समझाना ज़रूरी है जो दिल में है उसे आँखों से कहलाना ज़रूरी है,

मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने

mohabbat tark ki mai

मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी

दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ

door rah kar na

दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ याद रह जाएगी ये रात क़रीब आ जाओ, एक

मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी

milti hai zindagi me

मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी होती है दिलबरों की इनायत कभी कभी, शर्मा के मुँह न

हर तरह के जज़्बात का एलान हैं आँखें

har tarah ke zajbat

हर तरह के जज़्बात का एलान हैं आँखें शबनम कभी शो’ला कभी तूफ़ान हैं आँखें, आँखों से बड़ी

तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो

tum apna ranj o

तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो तुम्हें ग़म की क़सम इस दिल की वीरानी मुझे दे

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है

chehre pe khushi chha

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है जब तुम मुझे अपना कहते हो

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा

ye zulf agar khul

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा, जिस

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया

kabhi khud pe kabhi

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया, हम

रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह

rahte the kabhi jin

रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह बैठे हैं उन्ही के