सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

suna hai log use

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के

बदला मिज़ाज मैं ने जो अपना हवा के साथ

badla mizaj mai ne

बदला मिज़ाज मैं ने जो अपना हवा के साथ दरिया था मेरे साथ किनारा हवा के साथ, फिर

बे सोज़ ए निहाँ महव ए फ़ुग़ाँ हो नहीं सकता

be soz e nihaan

बे सोज़ ए निहाँ महव ए फ़ुग़ाँ हो नहीं सकता जब तक न लगे आग धुआँ हो नहीं

ग़ैरों के जब भी लुत्फ़ ओ करम याद आ गए

gairo ke jab bhi

ग़ैरों के जब भी लुत्फ़ ओ करम याद आ गए अपनों ने जो किए थे सितम याद आ

ग़म ए जानाँ से दिल मानूस जब से हो गया मुझ को

gam e jaanaan se

ग़म ए जानाँ से दिल मानूस जब से हो गया मुझ को हँसी अच्छी नहीं लगती ख़ुशी अच्छी

ऐसा तूफ़ाँ है कि साहिल का नज़ारा भी नहीं

aisa toofaan hai ki

ऐसा तूफ़ाँ है कि साहिल का नज़ारा भी नहीं डूबने वाले को तिनके का सहारा भी नहीं, की

गेसू रुख़ ए रौशन से वो टलने नहीं देते

gesu rukh e raushan

गेसू रुख़ ए रौशन से वो टलने नहीं देते दिन होते हुए धूप निकलने नहीं देते, आँचल में

दोनों आलम से वो बेगाना नज़र आता है

dono aalam se wo

दोनों आलम से वो बेगाना नज़र आता है जो तेरे इश्क़ में दीवाना नज़र आता है, इश्क़ ए

मुझे रंज होगा न मौत का अगर ऐसी मौत नसीब हो

mujhe ranj hoga na

मुझे रंज होगा न मौत का अगर ऐसी मौत नसीब हो मेरा दम जो निकले तो ऐ ख़ुदा

आग भी दिल में लगी है और अश्क ए ग़म भी है

aag bhi dil me

आग भी दिल में लगी है और अश्क ए ग़म भी है इश्क़ कहते हैं जिसे शोला भी