तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई

tujhe kaise ilm na ho saka

तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तेरे शहर ही की ये शाएरा

गुलामी में काम आती शमशीरें न तदबीरें

gulami me kaam aati shamshiren

गुलामी में काम आती शमशीरें न तदबीरें जो हो ज़ौक ए यकीं पैदा तो कट जाती हैं जंज़ीरें,

लोग क्या ख़ूब वफ़ाओ का सिला देते है

log kya khoob wafaaon ka sila dete hain

लोग क्या ख़ूब वफ़ाओ का सिला देते है ज़िन्दगी के हर मोड़ पे ज़ख्म नया देते है, कैसे

दिल के हर दर्द ने अशआर में ढलना चाहा

dil ke har dard ne ashaar me dhalna chaha

दिल के हर दर्द ने अशआर में ढलना चाहा अपना पैराहन ए बे रंग बदलना चाहा, कोई अनजानी

जब छाई घटा लहराई धनक एक हुस्न ए मुकम्मल याद आया

jab chhaai ghata lahraai dhanak ek husn e muqammal

जब छाई घटा लहराई धनक एक हुस्न ए मुकम्मल याद आया उन हाथों की मेहंदी याद आई उन

कोई सनम तो हो कोई अपना ख़ुदा तो हो

koi sanam to ho koi apna khuda to ho

कोई सनम तो हो कोई अपना ख़ुदा तो हो इस दश्त ए बेकसी में कोई आसरा तो हो,

चुपचाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो

chupchap sulgata hai diya tum bhi

चुपचाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो किस दर्द को कहते हैं वफ़ा तुम भी तो देखो,

रोज़ कहाँ से कोई नया पन अपने आप में लाएँगे

roz roz kahan se koi naya pan

रोज़ कहाँ से कोई नया पन अपने आप में लाएँगे तुम भी तंग आ जाओगे एक दिन हम

समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं

samndar me utarta hoon to aankhen

समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती

आँखों से मेरी इस लिए लाली नहीं जाती

aankhon se meri is liye laali nahi

आँखों से मेरी इस लिए लाली नहीं जाती यादों से कोई रात जो ख़ाली नहीं जाती, अब उम्र