ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है
ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है कि ज़िंदगी मेरी क्यों ख़ुशगवार गुज़री है ? ख़ुशी
Love Poetry
ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है कि ज़िंदगी मेरी क्यों ख़ुशगवार गुज़री है ? ख़ुशी
मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली हर एक चीज़ मिली एक ज़िंदगी न मिली, तेरी
ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है आग सीने में उसी ने तो लगाई हुई है, एक
तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ अब के किसी बेनाम से मौसम की तरह आ,
दिल से अगर कभी तेरा अरमान जाएगा घर को लगा के आग ये मेहमान जाएगा, सब होंगे उस
झूठी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए धुंदली ही सही लेकिन एक शम्अ तो जल जाए,
ग़म ए हिज्राँ से ज़रा यूँ भी निभाई जाए महफ़िल ए ग़ैर सही आज सजाई जाए, इख़्तिलाफ़ात की
फिरे राह से वो यहाँ आते आते अजल मर रही तू कहाँ आते आते ? न जाना कि
आप का एतिबार कौन करे रोज़ का इंतिज़ार कौन करे ? ज़िक्र ए मेहर ओ वफ़ा तो हम
उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं बाइस ए तर्क ए मुलाक़ात बताते भी नहीं, मुंतज़िर