दर्द से दिल ने वास्ता रखा
दर्द से दिल ने वास्ता रखा वक़्त बदलेगा हौसला रखा, रो दिए मेरे हाल पे पंछी चुगने जब
Love Poetry
दर्द से दिल ने वास्ता रखा वक़्त बदलेगा हौसला रखा, रो दिए मेरे हाल पे पंछी चुगने जब
उल्फ़तों का ख़ुदा नहीं हूँ मैं रंज ओ ग़म से जुदा नहीं हूँ मैं, एक अर्सा हुआ गए
बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले फिर अजब क्या है कि बच्चे भी लड़ाके निकले, ध्यान
काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता फिर मुझे तुझ से क्या गिला होता ? इश्क़ होता है क्या
इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है मुट्ठी में जहाँ पाँव में ज़ंजीर अजब है, बे वक़अत
गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब हटा दिए हैं ज़मान ओ मकाँ के हम
जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है क़द ओ गेसू से अपना सिलसिला
आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में सुर्ख़ काँटों की बहार आई है अब के बन
वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है वो शो’ला ए आवारा हमारी ही
सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी पयाम ए ज़ेर लबी को सला ए आम करें, ग़ुलाम