करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी

karta hai koi ab bhi paziraaee humari

करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी रुस्वाई भी लगती नहीं रुस्वाई हमारी, हम देख के दुनिया भी

चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ

chashm dekhoon na main us kee na hee abroo dekhoon

चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ फिर वो क्या शय है जिसे दुनिया में

वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में

wo aa ke baithe the jis waqt aashiyane me

वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में अमीर झाँक रहे थे ग़रीब ख़ाने में, हज़ार क़ाफ़िले

ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त

zindagi aise chal rahi hai dost

ज़िंदगी ऐसे चल रही है दोस्त जैसे मय्यत निकल रही है दोस्त, आज जाना है ग़म की महफ़िल

आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे

aankh se kaise kahoon ab bhi andhera dekhe

आँख से कैसे कहूँ अब भी अंधेरा देखे मुद्दतें बीत गईं धूप का जल्वा देखे, दो गिलासों में

तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है

tu to tanha sar e bazar nikal jaata hai

तू तो तन्हा सर ए बाज़ार निकल जाता है देखते देखते माहौल बदल जाता है, तुम ने हर

तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले

tu mujhe yaad kare aisa tareeqa nikale

तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले मेरी यकतरफ़ा मोहब्बत का नतीजा निकले, तेरी आँखों में दिखाई दे

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद

dil kisi ka na hua ek kharidar ke baad

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बाद यहाँ लोग बाज़ार लगा लेते हैं बाज़ार के बाद,

रह रह के याद आती है उस शर्मसार की

rah rah ke yaad aati hai us sharmsar kee

रह रह के याद आती है उस शर्मसार की बे इख़्तियारी देख मेरे इख़्तियार की, डर है कि

हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए

hum ek roz us ko bhulaane nikal gaye

हम एक रोज़ उस को भुलाने निकल गए जब आए लौट कर तो ज़माने निकल गए, एक शख़्स