महफ़िल से मुझको उठाने के बाद

mahfil-se-mujhko-uthane

महफ़िल से मुझको उठाने के बाद क्या मिलेगा दिल दुखाने के बाद, आज तो देख लूँ मैं तुम्हे

अपने हो कर भी जो नहीं मिलते

apne-ho-kar-bhi

अपने हो कर भी जो नहीं मिलते दिल ये जा कर है क्यूँ वही मिलते ? यहाँ मिलती

यूँ बात बात पे कर के मुकालमा मुझसे

yun-baat-baat-pe

यूँ बात बात पे कर के मुकालमा मुझसे वो खुल रहा है मुसलसल ज़रा ज़रा मुझसे, मैं शाख

तेरे लिए सब छोड़ के भी तेरा न रहा मैं

tere-liye-sab-chhod

तेरे लिए सब छोड़ के भी तेरा न रहा मैं दुनियाँ भी गई इश्क़ में, तुझसे भी गया

इस मुहब्बत के करम से पहले

is-muhabbat-ke-karam

इस मुहब्बत के करम से पहले ख़ुद को जीता था मैं तुमसे पहले, हसरत ओ यास ओ अलम

तुझे क्या बताऊँ ऐ दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है

tumhe-kya-bataaoon-ae

तुझे क्या बताऊँ ऐ दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है मुझे जुस्तुजू है फ़क़त तेरी मुझे सिर्फ़ तेरा

ज़हे क़िस्मत अगर तुम को हमारा दिल पसंद आया

jah-e-qismat-agar

ज़हे क़िस्मत अगर तुम को हमारा दिल पसंद आया मगर ये दाग़ क्यूँ कर ऐ मह-ए-कामिल पसंद आया,

ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू

khud-ko-n-ae

ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू दरिया की तेज धार को हिम्मत से मोड़

सुना कर हाल क़िस्मत आज़मा कर लौट आए हैं…

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सुना कर हाल क़िस्मत आज़मा कर लौट आए हैं उन्हें कुछ और बेगाना बना कर लौट आए हैं,

हाथ उठे जो दुआ को, तो दिल ऐसे रखा…

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हाथ उठे जो दुआ को, तो दिल ऐसे रखा ख्वाहिशे बाद में रखी तुझे पहले रखा, वक़्त ने