अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी…

ab jo bichhde hai to bichhadne ki shikayat kaisi

अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी मौत के दरिया में उतरे तो जीने की इजाजत

कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है…

kaun kahta hai sharart se tumhe dekhte hai

कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है जान ए मन हम तो मुहब्बत से तुम्हे देखते है,

तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे…

tu samjhta hai ki ham rishto ki duhaai denge

तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे हम तो वो हैं तेरे चेहरे से दिखाई देंगे, हम

तेरे में अब तो रही बात वो नहीं है दोस्त…

tere me to rahi ab wo baat nahi

तेरे में अब तो रही बात वो नहीं है दोस्त हुई ये अपनी मुलाक़ात वो नहीं है दोस्त,

हिज़्र ए गम क़ुर्ब में तन्हाई रुलाती होगी…

hizr e gam qurb me tanhaai

हिज़्र ए गम क़ुर्ब में तन्हाई रुलाती होगी याद मेरी भी उसे फिर तो सताती होगी, ऐ हवा

तुम्हे न फिर से सताएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़…

tumhe fir na satayenge ham khuda hafiz

तुम्हे न फिर से सताएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़ कि अब न लौट के आएँगे हम, ख़ुदा हाफिज़, रखेंगे

दिल ने जब जब तुझ पे इंहिसार किया…

dil ne jab jab tujh pe inhisar kiya

दिल ने जब जब तुझ पे इंहिसार किया तुमने ख़ुद को और भी बे ऐतबार किया, तू चल

नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है…

nadaan na ban tu har sawal ka jawab janta hai

नादान न बन इतना तू हर सवाल का जवाब जानता है मेरी नींदे चुराने वाले तू मेरा हर

वही बहाना बना है उदास होने का…

bahut guman tha mausam shanas hone ka

बहुत गुमान था मौसम शनास होने का वही बहाना बना है उदास होने का, बदन को काढ़ लिया

अना से तर्क ए अना तक सफ़र किया जाए…

bahut kathin hi sahi magar kiya jaaye

बहुत कठिन ही सही मगर किया जाए अना से तर्क ए अना तक सफ़र किया जाए, जब अपनी