तलब की राहों में सारे आलम नए नए से…

talab ki raahon me saare alam naye naye se

तलब की राहों में सारे आलम नए नए से शजर हजर लोग शहर मौसम नए नए से, चमक

सुख़नवरी का बहाना बनाता रहता हूँ…

sukhanwari ka bahana banata rahta hoon

सुख़नवरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से शर्मिंदा

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह…

falsafe ishq me pesh aaye sawalo ki tarah

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह हम परेशाँ ही रहे अपने ख्यालो की तरह, शीशागर बैठे

आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो…

aansoo ho udasi ho khamosh chitkar ho

आँसू हो, उदासी हो और ख़ामोश चीत्कार हो गज़ल कहनी हो तो पहले किसी से प्यार हो, कलम

हालात थे ख़राब या मैं ख़राब था…

halaat the kharab yaa main kharab tha

हालात थे ख़राब या मैं ख़राब था मेरे सवाल में शामिल जवाब था, ख़ुशी मेरी क़िस्मत ने छिनी

कभी लोग बदले कभी ठिकाना बदला…

saaqi na mil saka fir bhi use

कभी लोग बदले कभी ठिकाना बदला कभी सनम कभी सनम खाना बदला, साक़ी न मिल सका फिर भी

ऐ दिल ये तेरी ज़िद्द मुझे नादानी लगती है…

ae dil ye teri zidd mujhe nadaani lagti hai

ऐ दिल ये तेरी ज़िद्द मुझे नादानी लगती है उसे पाने की उम्मीद अब बेमानी लगती है, क्यों

सितम सितम न रहा जब सनम सनम न रहा…

sitam sitam na raha jab sanam sanam na raha

सितम सितम न रहा जब सनम सनम न रहा कुछ ऐसे दर्द ने घेरा कि गम भी गम

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया…

jaate jaate wo mujhe achchi nishani de gaya

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया, उससे मैं कुछ

सोयें कहाँ थे आँखों ने तकिए भिगोये थे…

soye kahan the aankh ne takiye bhigoye tha

सोयें कहाँ थे आँखों ने तकिए भिगोये थे हम भी कभी किसी के लिए ख़ूब रोये थे, अँगनाई