उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं…

unse miliye jo fer badal wale hai

उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं हमसे मत बोलिए हम लोग ग़ज़ल वाले हैं, कैसे शफ़्फ़ाफ़

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए…

tu gazal ban ke utar baat muqammal ho jaaye

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए मुंतज़िर दिल की मुनाजात मुकम्मल हो जाए, उम्र भर

हाल ए दिल पे ही शायर बुनते है गज़ल…

haal e dil pe hi shayar bunte hai gazal

हाल ए दिल पे ही शायर बुनते है गज़ल जो बात दिल की समझते है वो सुनते है

ये विसाल ओ हिज़्र का मसअला तो…

ye visal o hizr ka mas'ala to meri samjh me naa

ये विसाल ओ हिज़्र का मसअला तो मेरी समझ में न आ सका कभी कोई मुझको न पा

हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते…

gazal me tera charcha nahi hone dete

हम ग़ज़ल में तेरा चर्चा नहीं होने देते तेरी यादों को भी रुस्वा नहीं होने देते, कुछ तो

मेरे थके हुए शानों से बोझ उतर तो गया…

mere thake hue shano se bojh utar to gaya

मेरे थके हुए शानों से बोझ उतर तो गया बहुत तवील था ये दिन मगर गुज़र तो गया,

तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं…

tum pucho aur main naa bataaooun

तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो

समझता खूब है वो भी बयान की कीमत…

samjhta hai wo bhi khoob bayan ki qeemat

समझता खूब है वो भी बयान की कीमत चुका रहा है जो अब भी ज़ुबान की कीमत, इसी

दुश्मन मेरी ख़ुशियों का ज़माना ही नहीं था…

dushman meri khushiyo ka zamana hi nahi tha

दुश्मन मेरी ख़ुशियों का ज़माना ही नहीं था तुमने भी कभी अपना तो जाना ही नहीं था, क्या

ज़ख्म ए तन्हाई में ख़ुशबू ए हिना किसकी थी…

zakhm e tanhai me khushboo e hina kiski thi

ज़ख्म ए तन्हाई में ख़ुशबू ए हिना किसकी थी साया दीवार पे मेरा था, सदा किसकी थी ?