ये दिल टूट न जाए इस बात पर

ye-dil-tut-na

ये दिल टूट न जाए इस बात पर एक तरफ़ा ही ज़ोर लगाया मैंने, मेरे दिल की आवाज़

शरीक ए आलम ए कैफ़ ओ सुरूर….

shariq-e-alam-e

शरीक ए आलम ए कैफ़ ओ सुरूर मैं भी था कि रात जश्न में तेरे हुज़ूर मैं भी

मुझे तन्हाई के ग़म से बचा लेते तो अच्छा था

mujhe-tanhaai-ke-gam

मुझे तन्हाई के ग़म से बचा लेते तो अच्छा था सफ़र में हमसफ़र अपना बना लेते तो अच्छा

सुबह तक मैं सोचता हूँ शाम से

subah-tak-sochta-hoon

सुबह तक मैं सोचता हूँ शाम से जी रहा है कौन मेरे नाम से, शहर में सच बोलता

वो सर फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे

wo-sar-firi-hawa

वो सर फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे मैं आख़िरी चराग़ था जलना पड़ा मुझे, महसूस कर रहा

न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़

na-jism-saath-hamare

न जिस्म साथ हमारे न जाँ हमारी तरफ़ है कुछ भी हम में हमारा कहाँ हमारी तरफ़, खड़े

मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है

mere-dil-me-jab

मेरे दिल में जब कोई मलाल होता है तुम क्या जानो मेरा कैसा हाल होता है, मेरी हर

ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है

gamo-ka-sailab-aya

ग़मों का सैलाब आया ज़रूर है कुछ खोया तो कुछ पाया ज़रूर है, एक तुम हो जो दर्द

इस दिल में आह, आँखों में नाले है

is-dil-me-aah

इस दिल में आह, आँखों में नाले है हमें न सताओ हम तुम्हारे चाहने वाले है, मुहब्बत भरे

चलो अब यूँ भी आज़माए कभी

chalo-ab-yun-bhi

चलो अब यूँ भी आज़माए कभी तुम कह दो तो भूल जाए कभी, ज़िस्म मुर्दा हुआ तो ये