पी ली तो कुछ पता न चला वो सुरूर था

pee li to kuch pata na chala wo surur tha

पी ली तो कुछ पता न चला वो सुरूर था वो उस का साया था कि वही रश्क

नाम लिखते है तेरा और मिटा देते है…

naam likhte hai tera aur mita dete hai

नाम लिखते है तेरा और मिटा देते है यूँ इस दिल को मुहब्बत की सज़ा देते है, उम्र

क्या ऐसे कम सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे

kya aise kam sukhan se koi guftagoo kare

क्या ऐसे कम सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे जो मुस्तक़िल सुकूत से दिल को लहू करे, अब तो

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं…

wahi fir mujhe yaad aane lage hain

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं, वो हैं पास और याद

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार…

laga jab aks e abroo dekhne dildar paani men

लगा जब अक्स ए अबरू देखने दिलदार पानी में बहम हर मौज से चलने लगी तलवार पानी में,

ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं

ye sochna galat hai ki tum par nazar

ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बेख़बर नहीं, अब तो

आ जाए वो मिलने तो मुझे ईद मुबारक

aa jaaye wo milne to mujhe eid mubarak

आ जाए वो मिलने तो मुझे ईद मुबारक मत आए ब हर हाल उसे ईद मुबारक, ऐसा हो

एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले

ek tarikh muqarrar pe to har maah mile

एक तारीख़ मुक़र्रर पे तो हर माह मिले जैसे दफ़्तर में किसी शख़्स को तनख़्वाह मिले, रंग उखड़

तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ

tu kaash mile mujhko akeli to bataaoo

तू काश मिले मुझको अकेली तो बताऊँ सुलझे मेरी क़िस्मत की पहेली तो बताऊँ, आने से तेरे पहले

ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है

zulf o rukh ke saaye me zindagi guzaari hai

ज़ुल्फ़ ओ रुख़ के साए में ज़िंदगी गुज़ारी है धूप भी हमारी है छाँव भी हमारी है, ग़मगुसार