मुसाफ़िर भी सफ़र में इम्तिहाँ देने से डरते हैं

musafir bhi safar me

मुसाफ़िर भी सफ़र में इम्तिहाँ देने से डरते हैं मोहब्बत क्या करेंगे वो जो जाँ देने से डरते

वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं…

wo shakhs ki main jis se mohabbat nahi karta

वो शख़्स कि मैं जिस से मोहब्बत नहीं करता हँसता है मुझे देख के नफ़रत नहीं करता, पकड़ा

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो…

wo dil hi kya tere milne ki jo duaa na kare

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे मैं तुझ को भूल के ज़िंदा रहूँ

उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना

use mana kar gurur us ka badha na dena

उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना वो सामने आए भी तो उस को सदा न

अब भला छोड़ के घर क्या करते…

ab bhala chod ke ghar kya karte

अब भला छोड़ के घर क्या करते शाम के वक़्त सफ़र क्या करते, तेरी मसरूफ़ियतें जानते हैं अपने

तू ने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद

tune dekha hai kabhi ek nazar shaam ke baad

तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शजर शाम के बाद,

अनोखी वज़अ है सारे ज़माने से निराले हैं

anokhi vazaa hai saare jahan se nirale hai

अनोखी वज़अ है सारे ज़माने से निराले हैं ये आशिक कौन सी बस्ती के या रब ! रहने

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस

milna na milna ek bahana hai aur bas

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस तुम सच हो बाक़ी जो है फ़साना है और बस,

सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ

sukhan vari ka bahana banaata rahta hoon

सुख़न वरी का बहाना बनाता रहता हूँ तेरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ, मैं अपने आप से

मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी…

masrufiyat usi ki hai fursat usi ki hai

मसरूफ़ियत उसी की है फ़ुर्सत उसी की है इस सरज़मीन ए दिल पे हुकूमत उसी की है, मिलता