ख़ुद आगही का अजब रोग लग गया है

khud aagahi ka azab rog

ख़ुद आगही का अजब रोग लग गया है मुझे कि अपनी ज़ात पे धोका तेरा हुआ है मुझे,

सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ?

sabab e chashm e tar kaise

सबब ए चश्म ए तर कैसे बताऊँ तुझे ? ज़ख़्म ए दिल ओ जाँ कैसे दिखाऊं तुझे ?

दिल किस के तसव्वुर में जाने…

dil kis ke tasavvur me jaane

दिल किस के तसव्वुर में जाने रातों को परेशाँ होता है ये हुस्न ए तलब की बात नहीं

दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब…

dil hizr ke dard se bojhl hai

दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो इस बात से हम को

दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो

ishq dil me be payaan sauda ho to aisa ho

दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो दरिया हो तो ऐसा हो सहरा हो तो

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था

faasle aise bhi honge ye kabhi sochaa na tha

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था,

जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख…

jina mushkil hai ki aasaan zara dekh to lo

जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो, फिर

ज़ब्त ए ग़म पर ज़वाल क्यों आया

zabt e gam par jawal kyon aya

ज़ब्त ए ग़म पर ज़वाल क्यों आया शिद्दतों में उबाल क्यों आया ? गुल से खिलवाड़ कर रही

वो दिल नवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं

wo dil nawaz hai lekin nazar shanaas nahi

वो दिल नवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं

वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न…

wo is ada se jo aaye to kyun bhala na lage

वो इस अदा से जो आए तो क्यूँ भला न लगे हज़ार बार मिलो फिर भी आश्ना न