देखोगे हमें रोज़ मगर बात न होगी

dekhoge hame roz magar baat na hogi

देखोगे हमें रोज़ मगर बात न होगी एक शहर में रह कर भी मुलाक़ात न होगी, कहना है

इश्क़ मैंने लिख डाला क़ौमीयत के ख़ाने में

ishq maine likh daala qaumiyat ke khaane me

इश्क़ मैंने लिख डाला क़ौमीयत के ख़ाने में और तेरा दिल लिखा शहरियत के ख़ाने में, मुझको तजरबों

नदी में बहते थे नीलम ज़मीन धानी थी

nadee me bahte the neelam zamin dhani thi

नदी में बहते थे नीलम ज़मीन धानी थी तुम्हारे वायदे की रंगत जो आसमानी थी, वफ़ा को दे

माना कि यहाँ अपनी शनासाई भी कम है

maana ki yahan apni shanaasaai bhi kam hai

माना कि यहाँ अपनी शनासाई भी कम है पर तेरे यहाँ रस्म ए पज़ीराई भी कम है, हाँ

राहत ए वस्ल बिना हिज्र की शिद्दत के बग़ैर

rahat e vasl bina hizr ki shiddat

राहत ए वस्ल बिना हिज्र की शिद्दत के बग़ैर ज़िंदगी कैसे बसर होगी मोहब्बत के बग़ैर, अब के

मैं ख्याल हूँ किसी और का मुझे सोचता…

main khyal hoon kisi aur ka

मैं ख्याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है सर ए आईना मेरा अक्स है पस

हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे

har ek baat na kyun zahar si

हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे कि हमको दस्त ए ज़माना से ज़ख़्मकारी लगे, उदासियाँ

हमने उसकी आँखे पढ़ ली…

hamne uski aankhe padh li

हमने उसकी आँखे पढ़ ली छुपा कोई चेहरा है शायद ! वो हर बात पे हँस देती है

हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे

ham taraste hi taraste hi taraste hi

हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे वो फ़लाने से फ़लाने से फ़लाने से मिले, ख़ुद से

ये मुहब्बतों के किस्से भी अज़ीब होते है

ye muhabbaton ke qisse bhi azib hote..

ये मुहब्बतों के किस्से भी अज़ीब होते है बेवफ़ा ही इसमें अक्सर अज़ीज़ होते है, चाहों में कोई