गूँगे लफ़्ज़ों का ये बेसम्त सफ़र मेरा है

googne lafzon ka ye besamt safar mera hai

गूँगे लफ़्ज़ों का ये बेसम्त सफ़र मेरा है गुफ़्तुगू उसकी है लहजे में असर मेरा है, मैं ने

भीड़ में कोई शनासा भी नहीं छोड़ती है

bhid me koi shanasa bhi nahi chhodti hai

भीड़ में कोई शनासा भी नहीं छोड़ती है ज़िंदगी मुझको अकेला भी नहीं छोड़ती है, आफ़ियत का कोई

ऐ यक़ीनों के ख़ुदा शहर ए गुमाँ…

ae yaqino ke khuda shahar e gumaan kis ka hai

ऐ यक़ीनों के ख़ुदा शहर ए गुमाँ किस का है नूर तेरा है चराग़ों में धुआँ किस का

हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ…

haay logo ki karam farmaaiyan

हाए लोगों की करम फ़रमाइयाँ तोहमतें बदनामियाँ रुस्वाइयाँ, ज़िंदगी शायद इसी का नाम है दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ, क्या

फूल,खुशबू, कली की बात करें

fool khushboo kali ki baat kare

फूल,खुशबू, कली की बात करें प्यार की, आशिकी की बात करें मौत का खौफ़ भूल कर यारो क्यूँ

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे

kya zamana tha ki ham roz mila karte the

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ

जब से तेरी हर बात में रहने लगे

jab se teri har baat me rahne lage

जब से तेरी हर बात में रहने लगे दुश्मन मेरे औक़ात में रहने लगे, ये बात भी उनको

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से…

kahani dard o gam ki zindagi se kya kahta

कहानी दर्द ओ गम की ज़िन्दगी से क्या कहता ? सबब ए रंज़ ओ गम जो है उसी

कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं…

karb e furqat ruh se jata nahi

कर्ब ए फ़ुर्क़त रूह से जाता नहीं हल कोई ग़म का नज़र आता नहीं, काश होता इल्म ये

हालात ए ज़िन्दगी से हुए मज़बूर…

haalaat e zindagi se hue mazboor kya kare

हालात ए ज़िन्दगी से हुए मज़बूर क्या करे ? ज़ख्म ए ज़िगर भी हो गए नासूर क्या करे