ख़्वाबो को मेरे प्यार की ताबीर बख्श दे

khwabo ko mere pyar ki tabir

ख़्वाबो को मेरे प्यार की ताबीर बख्श दे दिल को मेरे इश्क़ की ज़ागीर बख्श दे, कब से

उलझे काँटों से कि खेले गुल ए तर से…

uljhe kaanto se ki khele gul e tar

उलझे काँटों से कि खेले गुल ए तर से पहले फ़िक्र ये है कि सबा आए किधर से

वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे…

wahi dard wahi bebasi tere gaanv mere shahar me

वही दर्द है वही बेबसी तेरे गाँव में मेरे शहर में बे गमो की भीड़ में आदमी तेरे

ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर

gam ke har ek rang se mujhko

ग़म के हर एक रंग से मुझको शनासा कर गया वो मेरा मोहसिन मुझे पत्थर से हीरा कर

ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया

gam hai wahi pa gam ka sahara guzar

ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया दरिया ठहर गया है किनारा गुज़र गया, बस ये

दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए

dil ke bahlane ka samaan na

दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए मुझको अब इतना भी आसान न समझा जाए, मैं भी

दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो

ishq dil me be payaan sauda ho to aisa ho

दिल इश्क़ में बे पायाँ सौदा हो तो ऐसा हो दरिया हो तो ऐसा हो सहरा हो तो

वो एक रात की गर्दिश में इतना हार गया

wo ek raat ki gardish me itna haar gaya

वो एक रात की गर्दिश में इतना हार गया लिबास पहने रहा और बदन उतार गया, हसब नसब

ख़ुद को इतना जो हवादार समझ रखा है

khud ko itna jo hawadaar samjh rakha

ख़ुद को इतना जो हवादार समझ रखा है क्या हमें रेत की दीवार समझ रखा है, हमने किरदार

दर्द आसानी से कब पहलू बदल कर…

dard aasaani se kab pahlu badal kar nikla

दर्द आसानी से कब पहलू बदल कर निकला आँख का तिनका बहुत आँख मसल कर निकला, तेरे मेहमान