चर्चा है आज बस यही हर एक ज़बान पर

charcha hai aaj bas

चर्चा है आज बस यही हर एक ज़बान पर जल्दी बनेगी फ़िल्म मेंरी दास्तान पर, मैंने जमा के

जहाँ ग़म है न अब कोई ख़ुशी है

jahan gam hai na

जहाँ ग़म है न अब कोई ख़ुशी है मोहब्बत उस जगह पर आ गई है, जिसे देखो उसे

मुश्किल में है जान बहुत

mushkil me hai jaan

मुश्किल में है जान बहुत जान है अब हैरान बहुत,   उस पत्थर दिल इंसाँ पर होते रहे

लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में

lagta nahin hai dil

लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम ए ना पाएदार में, इन

कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया

koshish ke bavjood ye

कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया हर काम में हमेशा कोई काम रह गया, छोटी थी उम्र

अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आइना हो जाऊँगा

apne har har lafz

अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आइना हो जाऊँगा उस को छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो

इन्सान हूँ इंसानियत की तलब है

insan hoon insaniyat ki

इन्सान हूँ इंसानियत की तलब हैकिसी खुदाई का तलबगार नहीं हूँ, ख़ुमारी ए दौलत ना शोहरत का नशाअबतक

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से

dekha hai zindagi ko

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से, ऐ रूह-ए-अस्र जाग

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया

main zindagi ka saath

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया, बर्बादियों का सोग

ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें

ye ruke ruke se

ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म ए ज़िंदगी निबाहें,