यूँ लग रहा है जैसे कोई आस पास है
यूँ लग रहा है जैसे कोई आस पास है वो कौन है जो है भी नहीं और उदास
Life Status
यूँ लग रहा है जैसे कोई आस पास है वो कौन है जो है भी नहीं और उदास
सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना, जो साथ है
मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ दुनिया के कारोबार में हूँ भी नहीं भी हूँ,
उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना सच
बात ऐसी तो करो दिल पे असर कोई करे बिन तेरे कैसे जीया तुझ को ख़बर कोई करे,
जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाये,
आए हैं सराए में तो घर जाएँगे क्या है हम लोग किसी रोज़ गुज़र जाएँगे क्या है हम
कुछ अब की बार तो ऐसा बिफर गया पानी बहा के ले गया हर शय जिधर गया पानी,
फ़क़ीराना तबीअत थी बहुत बेबाक लहजा था कभी मुझ में भी हँसता खेलता एक शख़्स रहता था, बगूले
पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का काँटे करा रहे हैं तआरुफ़ गुलाब का, कैसा ये इंतिशार