वो ज़ख़्म छोड़ो अब जिसका निशान बाक़ी नहीं

wo zakhm chhodo ab

वो ज़ख़्म छोड़ो अब जिसका निशान बाक़ी नहीं सो मेरे हक़ में कोई भी बयान बाक़ी नहीं, बच्चे

दोस्ती है धर्म मेरा ज़ात मेरी

dosti hai dharm mera

दोस्ती है धर्म मेरा ज़ात मेरी दुश्मनों से पूछिए औक़ात मेरी, इश्क़ क्या है जाल है मैं ने

दुश्मन है कौन और मेरा यार कौन है

dushman hai kaun aur

दुश्मन है कौन और मेरा यार कौन है खुलता नहीं कि बरसर ए पैकार कौन है ? दरिया

हर घड़ी आफ़ियत हर घड़ी शुक्रिया

har ghadi aafiyat har

हर घड़ी आफ़ियत हर घड़ी शुक्रिया हासिल ए ज़िंदगी आगही शुक्रिया, मुझ को मर कर भी एक ज़िंदगी

बे सोज़ ए निहाँ महव ए फ़ुग़ाँ हो नहीं सकता

be soz e nihaan

बे सोज़ ए निहाँ महव ए फ़ुग़ाँ हो नहीं सकता जब तक न लगे आग धुआँ हो नहीं

ग़ैरों के जब भी लुत्फ़ ओ करम याद आ गए

gairo ke jab bhi

ग़ैरों के जब भी लुत्फ़ ओ करम याद आ गए अपनों ने जो किए थे सितम याद आ

ऐसा तूफ़ाँ है कि साहिल का नज़ारा भी नहीं

aisa toofaan hai ki

ऐसा तूफ़ाँ है कि साहिल का नज़ारा भी नहीं डूबने वाले को तिनके का सहारा भी नहीं, की

दोस्तों के सितम की बात करो

doston ke sitam ki

दोस्तों के सितम की बात करो बात ग़म की है ग़म की बात करो सच्ची बातों के हो

वक़्त जब साज़गार होता है

waqt jab saazgaar hota

वक़्त जब साज़गार होता है सच है दुश्मन भी यार होता है, बाँट ले ग़म जो ग़म के

आएगा कोई चल के ख़िज़ाँ से बहार में

aayega koi chal ke

आएगा कोई चल के ख़िज़ाँ से बहार में सदियाँ गुज़र गई हैं इसी इंतिज़ार में, छिड़ते ही साज़