कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे

kashti hawas hawaaon ke rukh par utaar de

कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे खोए होऊँ से मिल ये दलद्दर उतार दे, बे सम्त

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर

umr bhar chalte rahe hum waqt kee talwar par

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर,

ख़्वाब में मंज़र रह जाता है

khwab me manzar rah jata hai

ख़्वाब में मंज़र रह जाता है तकिए पर सर रह जाता है, आ पड़ती है झील आँखों में

तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है

taar e shabnam kee tarah soorat e khas tutati hai

तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है आस बँधने नहीं पाती है कि बस टूटती

गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने

girafta dil hai bahut aaj tere deewane

गिरफ़्ता दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने ख़ुदा करे कोई तेरे सिवा न पहचाने, मिटी मिटी सी उमीदें

मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा

main usse juda wo mujhse juda

मैं उससे जुदा वो मुझसे जुदा ये दोनों बातें एक सी हैं, आकाश में चाँद भी तारे भी

यकुम जनवरी है नया साल है

yakum janvari hai naya saal hai

यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है ? बचाए ख़ुदा शर की ज़द

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

jis taraf chahoon pahunch jaaoon masafat kaisi

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों

रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में

raqs karne ka mila huqm jo dariyaaon me

रक़्स करने का मिला हुक्म जो दरियाओं में हम ने ख़ुश हो के भँवर बाँध लिए पाँव में,

हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर

har chauk pe bhashan hai har manch pe qasam ka shor

हर चौक पे भाषण हैं, हर मंच पे क़सम का शोर पर रोटी की कतार में आज भी