जानते सब है मुझे, पहचानता कोई नहीं

ashna hote hue bhi

आशना होते हुए भी आशना कोई नहीं जानते सब है मुझे, पहचानता कोई नहीं, तन्हा मेरे ज़िम्मे क्यूँ

कितने ही पेड़ ख़ौफ़ ए ख़िज़ाँ से उजड़ गए…

कितने ही पेड़ ख़ौफ़

कितने ही पेड़ ख़ौफ़ ए ख़िज़ाँ से उजड़ गए कुछ बर्ग ए सब्ज़ वक़्त से पहले ही झड़

हो जाएगी जब तुम से शनासाई ज़रा और

ho jayegi jab tum

हो जाएगी जब तुम से शनासाई ज़रा और बढ़ जाएगी शायद मेरी तन्हाई ज़रा और, क्यूँ खुल गए

जीवन को दुख दुख को आग और आग को पानी कहते…

जीवन को दुख दुख

जीवन को दुख दुख को आग और आग को पानी कहते बच्चे लेकिन सोए हुए थे किस से

दुनियाँ के लोग खुशियाँ मनाने में रह गए…

दुनियाँ के लोग खुशियाँ

दुनियाँ के लोग खुशियाँ मनाने में रह गए हम बदनसीब अश्क बहाने में रह गए, कुछ जाँ निसार

हमसे क़ीमत तो ये पूरी ही लिया करती है

hamse-qimat-to-ye

हमसे क़ीमत तो ये पूरी ही लिया करती है ज़िन्दगी ख़्वाब अधूरे ही दिया करती है, हर मुहब्बत

मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले

muhabbat-kahan-ab-gharo

मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले यहाँ फूल भी पत्थरो में मिले, जो फिरते रहे दनदनाते हुए वही

चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो…

चंद सिक्को के एवज़

चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो इक्तिदार के नशे में धूत, लोगो पे ज़ुल्म

सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है…

सुनो दौर ए बेहिस

सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है हरामी जीत जाते है हलाली हार जाता

गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा

gam-e-wafa-ko

गम ए वफ़ा को पस ए पुश्त डालना होगा खटक रहा है जो काँटा निकालना होगा, फ़कीर ए