लोग कहते थे वो मौसम ही नहीं आने का…

sabz mausam me zard hawa dee usne

लोग कहते थे वो मौसम ही नहीं आने का अब के देखा तो नया रंग है वीराने का,

किसी से क्या कहे सुने अगर गुबार हो गए…

kisi se kya kahe sune agar gubar ho gaye

किसी से क्या कहे सुने अगर गुबार हो गए हम ही हवा की ज़द में थे हम ही

अब वो झोंके कहाँ सबा जैसे आग है शहर की हवा जैसे

ab wo jhonke kahan saba jaise

अब वो झोंके कहाँ सबा जैसे आग है शहर की हवा जैसे, शब सुलगती है दोपहर की तरह

दोस्ती को आम करना चाहता है…

dosti ko aam karna chahta hai wo khud ko neelam karna chahta hai

दोस्ती को आम करना चाहता है ख़ुद को नीलाम करना चाहता है, बेंच आया है घटा के हाथ

हम एक ख़ुदा के बन्दे है और एक जहाँ में बसते है

hum ek khuda ke bande aur ek jahan me baste hai

हम एक ख़ुदा के बन्दे है और एक जहाँ में बसते है, रब भी जब चाहे हम साथ

आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है…

आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है ये इनाद ए बाहमी का ही फ़क़त अंजाम है, हक़ शनासी

ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो…

zindagi-ye-to-nahi-tujhko-sanvara-hi-naa-ho

ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो कुछ न कुछ हम ने तेरा क़र्ज़ उतारा

बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच..

budha tappar tuta chhappar aur uspar barsate sach

बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होंगी, लंबी लंबी रातें सच, लफ़्जों

ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई…

le gaya dil me daba kar raaz koi

ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई पानियों पे लिख गया आवाज़ कोई, बाँध कर मेरे परो

हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है…

hizrato ka zamana bhi kya zamana hai

हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है उन्ही से दूर है जिनके लिए कमाना है, ख़ुशी ये है