जिस से मिल बैठे लगी वो शक्ल पहचानी हुई

jis-se-mil-baithe

जिस से मिल बैठे लगी वो शक्ल पहचानी हुई आज तक हमसे यही बस एक नादानी हुई, सैकड़ों

मैंने दुनियाँ से, मुझसे दुनियाँ ने

मैंने दुनियाँ से मुझसे

मैंने दुनियाँ से, मुझसे दुनियाँ ने सैकड़ो बार बेवफ़ाई की, आसमां चूमता है मेरे क़दम दाद दीजिए शिकश्तापाई

दिल चाहे कि आज कुछ सुनहरा लिखूँ

dil-chahe-ki-aaj

दिल चाहे कि आज कुछ सुनहरा लिखूँ मैं ज़ात पे मेरी एक पैरा लिखूँ, मैं लिखूँ हयात सारी

उधर की शय इधर कर दी गई है

udhar-ki-shay-idhar

उधर की शय इधर कर दी गई है ज़मीं ज़ेर ओ ज़बर कर दी गई है, ये काली

किस तवक़्क़ो’ पे क्या उठा रखिए ?

kis-tavaqqo-pe-kya

किस तवक़्क़ो’ पे क्या उठा रखिए ? दिल सलामत नहीं तो क्या रखिए ? लिखिए कुछ और दास्तान

किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले

kis-ko-malum-hai

किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले होगा कोई भी जहाँ ज़ात ए बशर से पहले

सवालो के बदले लहज़े ऐसे…

sata le hamko jo dilchaspi hai unhe hamko satane me

सवालो के बदले लहज़े ऐसे कि हमें जानते ही न हो जैसे, मिजाज़ मौसम भी न बदले वो

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी

ye-amiro-se-hamari

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी फिर कहाँ से बीच में मस्ज़िद ओ मंदिर आ गए ?

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे

bhala-gamo-se-kahan

भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे हम आँसुओं की तरह मुस्कुराने वाले थे, हम ही ने

भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ?

bharosa-kaise-kare-koi

भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ? न रहा सत्ता का यकीं हमको, न सत्ता