मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल

mujhpe hai saikdo ilzam mere saath na chal

मुझपे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मेंरे साथ न चल तू भी हो जाएगा बदनाम मेंरे साथ न चल, तू

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है

paron ko khol zamaana udaan dekhta hai

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है, मिला है हुस्न

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए

ye jo nang the ye jo naam the

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए ये ख़याल ए पुख़्ता जो ख़ाम थे

दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं

dil e nadaan ki baat thi

दिल ए नादान की बात थी और कुछ नहीं मुहब्बत स्याह रात थी और कुछ भी नहीं, आसानियों

हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया

haq mehar kitna hoga bataya nahi gaya

हक़ मेहर कितना होगा बताया नहीं गया शहज़ादियों को बाम पे लाया नहीं गया, कमज़ोर सी हदीस सुना

मुस्कुरा कर चलो खिलखिला कर चलो

muskura kar chalo khilkhila k

मुस्कुरा कर चलो खिलखिला कर चलो दिल किसी का मगर ना दुखा कर चलो, जिसकी ख़ुशबू जहाँ में

फ़ना के तीर हवा के परों में रखे हैं

fanaa ke teer hawa ke paron me

फ़ना के तीर हवा के परों में रखे हैं कि हम घरों की जगह मक़बरों में रखे है,

मगरूर परिंदों को ये ऐलान गया है

magrur parindon ko ye aelaan

मगरूर परिंदों को ये ऐलान गया है सय्याद नशेमन का पता जान गया है, यानि जिसे दीमक लगी

ख़ाली हाथ ही जाना है क्या खोना क्या पाना है

khaali hath hi jaana hai

ख़ाली हाथ ही जाना है क्या खोना क्या पाना है चाहे जितने नाते जोड़ें एक दिन टूट ही

ज़िन्दगी भर अज़ाब सहने को

zindagi bhar azaab sahne ko

ज़िन्दगी भर अज़ाब सहने को दिल मिला है उदास रहने को, एक चुप के हज़ारहा मफ़हूम और क्या