ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है

ये बात फिर मुझे

ये बात फिर मुझे सूरज बताने आया है अज़ल से मेरे तआ’क़ुब में मेरा साया है, बुलंद होती

जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब

जाने कब किस के

जाने कब किस के छलकने से हो दुनिया ग़र्क़ ए आब मेरी मुट्ठी में है दरिया साग़र ओ

ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था

ठीक है कि ये

ठीक है कि ये जहाँ मुद्दत से उर्यानी पे था पर किसे यूँ नाज़ कल तक चाक दामानी

दिल मेरा रक़्साँ है जब से अक़्ल इस शोरिश में है

दिल मेरा रक़्साँ है

दिल मेरा रक़्साँ है जब से अक़्ल इस शोरिश में है लर्ज़िश ए पा आसमाँ या ये जहाँ

मैं न कहता था कि शहरों में न जा यार मेरे

मैं न कहता था

मैं न कहता था कि शहरों में न जा यार मेरे सोंधी मिट्टी ही में होती है वफ़ा

दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही

दर्द ख़ामोश रहा टूटती

दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही मेरी हर शाम तेरी याद की हमराज़ रही, शहर में जब भी

मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो

मेरे लबों पे उसी

मेरे लबों पे उसी आदमी की प्यास न हो जो चाहता है मेरे सामने गिलास न हो, ये

जो शजर बे लिबास रहते हैं

जो शजर बे लिबास

जो शजर बे लिबास रहते हैं उन के साए उदास रहते हैं, चंद लम्हात की ख़ुशी के लिए

बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही

बुग्ज़ ए इस्लाम में

बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही यहाँ कितनो के क़िरदार गिरे है, सभी मुन्सफ़ गिरे, मनसब गिरे

कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया

कितनी मोहब्बतों से पहला

कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया मैं कुछ न जानता था सब कुछ मुझे सिखाया, अनपढ़ था और