मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से

Mushkil hai ki ab

मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से दस्तार पे बात आ गई होती हुई सर

बख़्श दे कुछ तो एतिबार मुझे

Bakhsh de kuch to

बख़्श दे कुछ तो एतिबार मुझे प्यार से देख चश्म ए यार मुझे, रात भी चाँद भी समुंदर

ज़ख़्म पुराने फूल सभी बासी हो जाएँगे

zakhm purane phool sabhi

ज़ख़्म पुराने फूल सभी बासी हो जाएँगे दर्द के सब क़िस्से याद ए माज़ी हो जाएँगे, साँसें लेती

तन्हा सफ़र में खुद को यूँ ही चलते देखा

tanha safar me khud

तन्हा सफ़र में खुद को यूँ ही चलते देखा भीड़ भरी दुनियाँ में खुद को संभलते देखा, ना

दिल की दुनिया में दुनिया न आये कभी

दिल की दुनिया में

दिल की दुनिया में दुनिया न आये कभी मेरे मौला ये दुनिया न भाये कभी, जिस को क़ुरआँ

फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे

फिर हरीफ़ ए बहार

फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे जाने किस किस को आज रो बैठे, थी मगर इतनी राएगाँ भी

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है

हम-पर-तुम्हारी-चाह

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है दुश्नाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है,

हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई

हम सादा ही ऐसे

हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई जिस बार ख़िज़ाँ आई समझे कि बहार आई, आशोब

गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था

गो सब को बहम

गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था ये शहर उदास इतना ज़ियादा तो नहीं था,

सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं

सोच बदल जाती है

सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं वक्त के साथ,लोगो के ख्यालात बदल जाते हैं, इस तरह चेहरे