वही बहाना बना है उदास होने का…

bahut guman tha mausam shanas hone ka

बहुत गुमान था मौसम शनास होने का वही बहाना बना है उदास होने का, बदन को काढ़ लिया

मैं जो महका तो मेरी शाख़ जला दी उसने…

sabz mausam me zard hawa dee usne

मैं जो महका तो मेरी शाख़ जला दी उसने सब्ज़ मौसम में मुझे ज़र्द हवा दी उसने, पहले

मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं…

hai dua yaad magar hraf e dua

है दुआ याद मगर हर्फ़ ए दुआ याद नहीं मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं, मैं

चराग़ ए तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है…

wo mere haal pe roya bhi muskuraya bhi

चराग़ ए तूर जलाओ बड़ा अँधेरा है ज़रा नक़ाब उठाओ बड़ा अँधेरा है, अभी तो सुब्ह के माथे

भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए…

bhuli hui sada hoo mujhe

भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए तुम से कहीं मिला हूँ मुझे याद कीजिए, मंज़िल नहीं हूँ

ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं…

gam ke muzrim khushi ke

ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं लोग अब ज़िंदगी के मुजरिम हैं, और कोई गुनाह याद नहीं

सोहनी धरती के रखवाले ये प्यारे खाक़ी वर्दी वाले…

pyare khaqi vardi wale

सोहनी धरती के रखवाले ये प्यारे खाक़ी वर्दी वाले, हर बाप का फ़ख्र ओ गुरुर है ये हर

हारे हुए नसीब का मयार देख कर

haare-hue-nasib-ka

हारे हुए नसीब का मयार देख कर वो चल पड़ा है इश्क़ का अख़बार देख कर, आयेंगी काम

छोड़ के सब कुछ फक़त तुम इन्सान बनो…

achcha insan bano

बना के भेजा था उस रब ने अपना तर्जुमान तुम्हे छोड़ के सब कुछ फक़त तुम इन्सान बनो,

उसमें कोई रईस मुज़रिम था

usme koi raies muzrim

उसमें कोई रईस मुज़रिम था जो कहानी नहीं सुनाई गई, एक मय्यत ज़मीं तले उतरी एक मय्यत नहीं