शाख़ से फूल से क्या उस का पता पूछती है…

shakh se fool se kya uska pata puchhti hai

शाख़ से फूल से क्या उसका पता पूछती है या फिर इस दश्त में कुछ और हवा पूछती

भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ ?

bhookh hai to sabr kar roti nahi to kya hua

भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ ? आजकल दिल्ली में है ज़ेर ए बहस

परिन्दे अब भी पर तोले हुए हैं…

parinde ab bhi par tole hue hai

परिन्दे अब भी पर तोले हुए हैं हवा में सनसनी घोले हुए हैं, तुम्हीं कमज़ोर पड़ते जा रहे

इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है…

is nadi ki dhaar se thandi hawa aati to hai

इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं…

kaise manzar samne aane lage hai

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं, अब तो इस तालाब का पानी

मैंने तो बहुत देखे अपने भी पराये भी…

maine to bahut dekhe apne bhi paraye bhi

मैंने तो बहुत देखे अपने भी पराये भी कुछ ज़िन्दगी भी देखी कुछ मौत के साये भी, इस

फ़तह की सुन के ख़बर, प्यार जताने आए…

fatah ki sun ke khabar pyar jataane aaye

फ़तह की सुन के ख़बर, प्यार जताने आए रूठे हुए थे हमसे यार रिश्तेदार मनाने आए, अच्छे दिन

नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते…

nasibo par nahi chalte laqiro par nahi chalte

नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते जो सचमुच में बड़े है वो लकीरों पर नहीं चलते,

नसीबो पर नहीं चलते नजीरों पर नहीं चलते…

नसीबो पर नहीं चलते

नसीबो पर नहीं चलते, नजीरों पर नहीं चलते जो सचमुच में बड़े है वो लकीरों पर नहीं चलते,

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह…

falsafe ishq me pesh aaye sawalo ki tarah

फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आये सवालो की तरह हम परेशाँ ही रहे अपने ख्यालो की तरह, शीशागर बैठे