अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले…

agar safar me mere saath mera yaar chale

अगर सफ़र में मेरे साथ मेरा यार चले तवाफ़ करता हुआ मौसम ए बहार चले, लगा के वक़्त

बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच..

budha tappar tuta chhappar aur uspar barsate sach

बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होंगी, लंबी लंबी रातें सच, लफ़्जों

ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई…

le gaya dil me daba kar raaz koi

ले गया दिल में दबा कर राज़ कोई पानियों पे लिख गया आवाज़ कोई, बाँध कर मेरे परो

हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है…

hizrato ka zamana bhi kya zamana hai

हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है उन्ही से दूर है जिनके लिए कमाना है, ख़ुशी ये है

समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ…

समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ हमें तो मुफ़्त में बदनाम कर गई दुनियाँ, मुतालबों से

अश्क ओ खूं घुलते है तब दीदा ए तर बनती है…

ashk o khoo ghulte hai tab deeda e tar banti hai

अश्क ओ खूं घुलते है तब दीदा ए तर बनती है दास्ताँ इश्क़ में मरने से अमर बनती

सभी कहें मेरे गम ख़्वार के अलावा भी…

koi to baat karo yaar ke alawa bhi

सभी कहें मेरे गम ख़्वार के अलावा भी कोई तो बात करो यार के अलावा भी, बहुत से

हर मुलाक़ात में लगते हैं वो बेगाने से…

har mulaqat me lagte hai wo begane se

हर मुलाक़ात में लगते हैं वो बेगाने से फ़ाएदा क्या है भला ऐसों के याराने से, कुछ जो

मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है…

muhabbat karne walo me jhagda daal deti hai

मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है सियासत दोस्ती की जड़ में मट्ठा डाल देती है,

उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं…

unse miliye jo fer badal wale hai

उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं हमसे मत बोलिए हम लोग ग़ज़ल वाले हैं, कैसे शफ़्फ़ाफ़