ख़्वाब के फूलों की ताबीरें कहानी हो गईं

khwab-ke-phoolo-ki

ख़्वाब के फूलों की ताबीरें कहानी हो गईं ख़ून ठंडा पड़ गया आँखें पुरानी हो गईं, जिस का

अज़ीब कर्ब में गुज़री जहाँ जहाँ गुज़री

azib-karb-me-guzri

अज़ीब कर्ब में गुज़री जहाँ जहाँ गुज़री अगरचे चाहने वालो के दरमियाँ गुज़री, तमाम उम्र चिराग़ ए उम्मीद

मेरी एक छोटी सी कोशिश तुम्हे पाने के लिए

meri-ek-chhoti-si

मेरी एक छोटी सी कोशिश तुम्हे पाने के लिए बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए, रेत

अधूरे ख़्वाब की अनोखी ताबीर होती है

adhure khwabo ki anokhi

अधूरे ख़्वाब की अनोखी ताबीर होती है हर हाथों में मुहब्बत की लकीर होती है, जरूरी तो नहीं

मौत तो एक दिन आनी ही है

kis simt chal padi hai khudai mere khuda

मौत तो एक दिन आनी ही है ज़िन्दगी जो मिली फ़ानी ही है, शख्स वो है अक्लमंद ओ

ऐसे मौसम में भला कौन जुदा होता है

aise-mausam-me-bhala

ऐसे मौसम में भला कौन जुदा होता है जैसे मौसम में तू हर रोज़ खफ़ा होता है, रोज़

मैं सुबह बेचता हूँ, मैं शाम बेचता हूँ

main-subah-bechta-hoo

मैं सुबह बेचता हूँ, मैं शाम बेचता हूँ नहीं मैं महज़ अपना काम बेचता हूँ, इन बूढ़े दरख्तों

पेड़ मुझे तब हसरत से देखा करते थे

ped-mujhe-tab-hasrat

पेड़ मुझे तब हसरत से देखा करते थे जब मैं जंगल में पानी लाया करता था, थक जाता

शोर करूँगा और न कुछ भी बोलूँगा

shor-karunga-aur-na

शोर करूँगा और न कुछ भी बोलूँगा ख़ामोशी से अपना रोना रो लूँगा, सारी उम्र इसी ख्वाहिश में

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला

dost-ban-kar-bhi

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला, अब उसे लोग