ख़ुशी ने मुझको ठुकराया है दर्द ओ गम ने पाला है

khushi ne mujhko thukraya hai dard o gam ne pala hai

ख़ुशी ने मुझको ठुकराया है दर्द ओ गम ने पाला है गुलो ने बे रुखी की है तो

इश्क़ मैंने लिख डाला क़ौमीयत के ख़ाने में

ishq maine likh daala qaumiyat ke khaane me

इश्क़ मैंने लिख डाला क़ौमीयत के ख़ाने में और तेरा दिल लिखा शहरियत के ख़ाने में, मुझको तजरबों

माना कि यहाँ अपनी शनासाई भी कम है

maana ki yahan apni shanaasaai bhi kam hai

माना कि यहाँ अपनी शनासाई भी कम है पर तेरे यहाँ रस्म ए पज़ीराई भी कम है, हाँ

हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे

har ek baat na kyun zahar si

हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे कि हमको दस्त ए ज़माना से ज़ख़्मकारी लगे, उदासियाँ

आदम की जात होकर इल्म बिसरा रहे हो

aadam ki jaat ho kar ilm bisra rahe

आदम की जात होकर इल्म बिसरा रहे हो क्यूँ मज़लूम ओ गरीब को बेवजह सता रहे हो ?

इंसानी सोच का मौसम बदलता रहता है

insani soch ka mausam badalta rahta hai

इंसानी सोच का मौसम बदलता रहता है फ़ितूरी दिमाग बेकाम भी चलता रहता है, ज़रा सी ओट ही

मैं सुन रहा हूँ जो दुनियाँ सुना रही है मुझे

main sun raha hoo jo duniyan suna rahi hai

मैं सुन रहा हूँ जो दुनियाँ सुना रही है मुझे हँसी तो अपनी ख़ामोशी पे आ रही है

चेहरे की हसी भी दिखावट सी हो रही है…

chehre ki hasi bhi dikhawat si ho rahi

चेहरे की हसी भी दिखावट सी हो रही है असल ज़िन्दगी भी बनावट सी हो रही है, अनबन

सच ये है कि बेकार का ही हमें गम…

sach ye hai ki bekaar ka hi hame gam hota hai

सच ये है कि बेकार का ही हमें गम होता है जैसा हम चाहे दुनियाँ में वो बहुत

अमूमन मेरी हसरत को चाहत का…

amuman meri hasrat ko chahat ka

अमूमन मेरी हसरत को चाहत का नाम दे गये लोग जीश्त को इन्तेहा ए आशिकी का पैग़ाम दे