जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है
जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है चोटियों पर सदा के लिए कौन ठहरता है ? बहुत
Life Poetry
जिस तरह चढ़ता है उसी तरह उतरता है चोटियों पर सदा के लिए कौन ठहरता है ? बहुत
दुख और तरह के हैं दुआ और तरह की और दामन ए क़ातिल की हवा और तरह की,
ऐ वक़्त ज़रा थम जा ये कैसी रवानी है आँखों में अभी बाक़ी एक ख्वाब ए जवानी है,
नज़र फ़रेब ए क़ज़ा खा गई तो क्या होगा हयात मौत से टकरा गई तो क्या होगा ?
चाँद पर बस्तियाँ तो बसा लोगे मगर चाँदनी कहाँ से लाओगे ? सलब कर लीं समाअतें सबकी किस
दुख दर्द के मारों से मेरा ज़िक्र न करना घर जाऊँ तो यारों से मेरा ज़िक्र न करना,
दयार ए नूर में तीरा शबों का साथी हो कोई तो हो जो मेरी वहशतों का साथी हो,
बस्ती भी समुंदर भी बयाबाँ भी मेरा है आँखें भी मेरी ख़्वाब ए परेशाँ भी मेरा है, जो
अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया कि एक उम्र चले और घर नहीं आया, उस एक
अज़ाब ए वहशत ए जाँ का सिला न माँगे कोई नए सफ़र के लिए रास्ता न माँगे कोई,