दुनियाँ ए अक़ीदत में अजब रस्म चली है

duniya e akidat me azab rasm

दुनियाँ ए अक़ीदत में अजब रस्म चली है जो दश्त में मजनूँ था वो मरकज़ मे वली है,

बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ

be niyazi ke silsile me

बे नियाज़ी के सिलसिले में हूँ मैं कहाँ अब तेरे नशे में हूँ, हिज्र तेरा मुझे सताता है

तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा

teri aankhon ne aankhon ka

तेरी आँखों ने आँखों का सिसकना भी नहीं देखा मुहब्बत भी नहीं देखी, तड़पना भी नहीं देखा, नहीं

जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो

jina mushkil hai ki aasaan

जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो हर शख़्स लगता है परेशान ज़रा देख तो लो,

झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी

jhagadna kaahe ka mere bhai

झगड़ना काहे का ? मेरे भाई पड़ी रहेगी ये बाप दादा की सब कमाई पड़ी रहेगी, अंधेरे कमरों

मौत भी क्या अज़ीब हस्ती है…

maut bhi kya azib hasti hai

मौत भी क्या अज़ीब हस्ती है जो ज़िंदगी के लिए तरसती है, दिल तो एक शहर है जुदाई

ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए

gam e jahan ko sharmsaar

ग़म ए जहाँ को शर्मसार करने वाले क्या हुए वो सारी उम्र इंतिज़ार करने वाले क्या हुए ?

हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत

harf e galat na tha

हर्फ़ ए गलत न था मुझे समझा गया गलत लिखा गया गलत कभी बोला गया गलत, मैं भी

दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं

dil me auro ke liye kina o kad

दिल में औरों के लिए कीना ओ कद रखते हैं वही लोग इख़्लास के पर्दे में हसद रखते

इंसान को वक़्त के हिसाब से चलना पड़ता है

insan ko waqt ke hisab se

इंसान को वक़्त के हिसाब से चलना पड़ता है बाद ठोकर ही सही आख़िर संभलना पड़ता है, हमदर्द