मेरे चेहरे में कोई और ही चेहरा देखे
मेरे चेहरे में कोई और ही चेहरा देखे वक़्त माथे की लकीरों में वो ठहरा देखे, सब को
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मेरे चेहरे में कोई और ही चेहरा देखे वक़्त माथे की लकीरों में वो ठहरा देखे, सब को
कहता रहे ज़माना गुनहगार ज़िंदगी कुछ लोग जी रहे हैं मज़ेदार ज़िंदगी, किरदार अपना अपना निभाते हैं सब
मिल के बैठें तो हम कहीं पहले बाँट लेते हैं क्यूँ ज़मीं पहले ? होगा तेरा भी एतिबार
अक़्ल की ऐसी ताबेदारी है ख़्वाहिशों में भी इंकिसारी है, चल पड़ी है अजल की राहों पर ज़िंदगी
हैं मेरी परवाज़ के तेवर नए साथ मेरे देखिए मंज़र नए, एक पुराने मयकदे में तिश्नगी ढूँढती है
कोई काबा न कलीसा न सनम मेरा है एक नए ख़्वाब की धरती पे क़दम मेरा है, सारी
अब आप रह ए दिल जो कुशादा नहीं रखते हम भी सफ़र ए जाँ का इरादा नहीं रखते,
इस ख़ाकदाँ में अब तक बाक़ी हैं कुछ शरर से दामन बचा के गुज़रो यादों की रहगुज़र से,
गूँजता है नाला ए महताब आधी रात को टूट जाते हैं सुहाने ख़्वाब आधी रात को, भागते सायों
पर्दा ए शब की ओट में ज़ोहरा जमाल खो गए दिल का कँवल बुझा तो शहर तीरा ओ