मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली

mujhe talash thi jis ki wahi kabhi na mili

मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली हर एक चीज़ मिली एक ज़िंदगी न मिली, तेरी

ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है

ye mohabbat jo mohabbat se kamaai hui hai

ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है आग सीने में उसी ने तो लगाई हुई है, एक

तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ

tu phool ki maanind na shabnam ki tarah aa

तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ अब के किसी बेनाम से मौसम की तरह आ,

दिल से अगर कभी तेरा अरमान जाएगा

dil se agar kabhi tera armaan jayega

दिल से अगर कभी तेरा अरमान जाएगा घर को लगा के आग ये मेहमान जाएगा, सब होंगे उस

डूबने वाले की मय्यत पर लाखों रोने वाले हैं

doobne wale ki mayyat par laakho rone wale hain

डूबने वाले की मय्यत पर लाखों रोने वाले हैं फूट फूट कर जो रोते हैं वही डुबोने वाले

ग़म हर एक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं

gam har ek aankh ko chhalkaaye zaruri to nahin

ग़म हर एक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं अब्र उठे और बरस जाए ज़रूरी तो नहीं, बर्क़

झूठी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए

jhuthi hi tasalli ho kuch dil to bahal jaaye

झूठी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए धुंदली ही सही लेकिन एक शम्अ तो जल जाए,

ग़म ए हिज्राँ से ज़रा यूँ भी निभाई जाए

gam e hizraan se zara yun bhi nibhaai jaaye

ग़म ए हिज्राँ से ज़रा यूँ भी निभाई जाए महफ़िल ए ग़ैर सही आज सजाई जाए, इख़्तिलाफ़ात की

आप का एतिबार कौन करे

aap ka aitibar kaun kare

आप का एतिबार कौन करे रोज़ का इंतिज़ार कौन करे ? ज़िक्र ए मेहर ओ वफ़ा तो हम

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

uzr aane me bhi hai aur bulaate bhi nahin

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं बाइस ए तर्क ए मुलाक़ात बताते भी नहीं, मुंतज़िर