हुई हम से ये नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे

hui hum se ye nadaani teri mahfil me aa baithe

हुई हम से ये नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे ज़मीं की ख़ाक हो कर आसमाँ से दिल

याद में तेरी जाग जाग के हम रात भर करवटें बदलते हैं

yaad me teri jaag jaag ke hum raat bhar karwaten badalte hai

याद में तेरी जाग जाग के हम रात भर करवटें बदलते हैं हर घड़ी दिल में तेरी उल्फ़त

दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ

dukho me us ke izaafa bhi main hi karta hoon

दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ और इस कमी का इज़ाला भी मैं ही

ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं

ye teri khalq nawazi ka takaza bhi nahin

ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं कहीं दरिया है रवाँ और कहीं क़तरा भी नहीं, अपने

मसअला ख़त्म हुआ चाहता है

masla khatm hua chahta hai

मसअला ख़त्म हुआ चाहता है दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है, कब तलक लोग अंधेरे में रहें

सारे भूले बिसरों की याद आती है

saare bhule bisro ki yaad aati hai

सारे भूले बिसरों की याद आती है एक ग़ज़ल सब ज़ख़्म हरे कर जाती है, पा लेने की

कितने अख़बार फ़रोशों को सहाफ़ी लिखा

kitne akhbaar faroshon ko sahafi likha

कितने अख़बार फ़रोशों को सहाफ़ी लिखा ना मुकम्मल को भी ख़ादिम ने इज़ाफ़ी लिखा, तू ने भूले से

पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं

pet ki aag bujhaane ka sabab kar rahe hai

पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं इस ज़माने के कई मीर मतब कर रहे हैं,

झूठ सच्चाई का हिस्सा हो गया

jhooth sachchai ka hissa ho gaya

झूठ सच्चाई का हिस्सा हो गया एक तरह से ये भी अच्छा हो गया, उस ने एक जादू

दिलों के माबैन शक की दीवार हो रही है

dilon ke maabain shaq kee deewar ho rahi hai

दिलों के माबैन शक की दीवार हो रही है तो क्या जुदाई की राह हमवार हो रही है