जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी

jab tera huqm mila tark e muhabbat kar dee

जब तेरा हुक्म मिला, तर्क ए मुहब्बत कर दी दिल मगर इस पे वो धड़का कि क़यामत कर

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है

koi hindu koi muslim koi isaai hai

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है, इतनी ख़ूँ

मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है

maayus e sham e gam tujhe is ki khabar bhi hai

मायूस ए शाम ए ग़म तुझे इस की ख़बर भी है तारीकियों की आड़ में नूर ए सहर

अहल ए दुनिया वाक़िफ़ ए असरार ए पिन्हाँ हो गए

ahal e duniya waaqif e asrar e pinha ho gaye

अहल ए दुनिया वाक़िफ़ ए असरार ए पिन्हाँ हो गए दास्तान ए ग़म सुना कर हम पशेमाँ हो

किस को ख़ुशी के साथ ग़म ए दो जहाँ नहीं

kis ko khushi ke saath gam e do jahan nahi

किस को ख़ुशी के साथ ग़म ए दो जहाँ नहीं वो कौन सी बहार है जिस की ख़िज़ाँ

ख़ाकज़ादे ख़ाक में या ख़ाक पर हैं आज भी

khaaqzaade khaaq me yaa khaaq par hai aaj bhi

ख़ाकज़ादे ख़ाक में या ख़ाक पर हैं आज भी सामने एक कूज़ागर के चाक पर हैं आज भी,

ये कैसा काम ऐ दस्त ए मसीह कर डाला

ye kaisa kaam ae dast e maseeh kar daala

ये कैसा काम ऐ दस्त ए मसीह कर डाला जो दिल का ज़ख़्म था वो ही सहीह कर

राहतों के धोके में इज़्तिराब ढूँढे हैं

raahton ke dhoke me iztirab dhoondhe hain

राहतों के धोके में इज़्तिराब ढूँढे हैं हम ने अपनी ख़ातिर ही ख़ुद अज़ाब ढूँढे हैं, ये तो

क़यामत वक़्त से पहले गुज़र जाए तो अच्छा हो

qayamat waqt se pahle guzar jaaye to achcha ho

क़यामत वक़्त से पहले गुज़र जाए तो अच्छा हो नज़र कुछ देर जल्वों पर ठहर जाए तो अच्छा

जब भी उन के हमें अंदाज़ ए नज़र याद आए

jab bhi un ke hume andaz e nazar yaad aaye

जब भी उन के हमें अंदाज़ ए नज़र याद आए दिल पे एक चोट लगी दर्द ए जिगर