कोई हालत नहीं ये हालत है

koi halat nahi ye halat hain

कोई हालत नहीं ये हालत है ये तो आशोब नाक सूरत है, अंजुमन में ये मेरी ख़ामोशी बुर्दबारी

चलो बाद ए बहारी जा रही है

chalo baad e bahaari jaa rahi hai

चलो बाद ए बहारी जा रही है पिया जी की सवारी जा रही है, शुमाल ए जावेदान ए

ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया

zabt kar ke hansi ko bhul gaya

ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया मैं तो उस ज़ख़्म ही को भूल गया, ज़ात दर ज़ात

बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं

bada ehsan farma rahe hain

बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं कि उन के ख़त उन्हें लौटा रहे हैं, नहीं तर्क ए मोहब्बत

किस से इज़हार ए मुद्दआ कीजे

kis se izhar e muddaa kije

किस से इज़हार ए मुद्दआ कीजे आप मिलते नहीं हैं क्या कीजे ? हो न पाया ये फ़ैसला

आदमी वक़्त पर गया होगा

aadmi waqt par gaya hoga

आदमी वक़्त पर गया होगा वक़्त पहले गुज़र गया होगा, वो हमारी तरफ़ न देख के भी कोई

बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या

bahut dil ko kushada kar liya kya

बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या ज़माने भर से वा’दा कर लिया क्या ? तो क्या सचमुच

हाल ये है कि ख़्वाहिश ए पुर्सिश ए हाल भी नहीं

haal ye hai ki khwahish e pursish e haal bhi nahin

हाल ये है कि ख़्वाहिश ए पुर्सिश ए हाल भी नहीं उस का ख़याल भी नहीं अपना ख़याल

सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई

sina dahak raha ho to kya chup rahe koi

सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई क्यूँ चीख़ चीख़ कर न गला छील ले कोई

उस के पहलू से लग के चलते हैं

us ke pahlu se lag ke chalte hai

उस के पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं बंद है मय-कदों के