लोक गीतों का नगर याद आया

lok geeto ka nagar yaad aaya

लोक गीतों का नगर याद आया आज परदेस में घर याद आया, जब चले आए चमन ज़ार से

नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं

nazar nazar me liye tera pyar firte hain

नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं मिसाल ए मौज ए नसीम ए बहार फिरते हैं, तेरे

शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ

shahar veeraan udaas hain galiyan

शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ रहगुज़ारों से उठ रहा है धुआँ, आतिश ए ग़म में जल रहे हैं

तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग

tu rang hai gubar hai teri gali ke log

तू रंग है ग़ुबार हैं तेरी गली के लोग तो फूल है शरार हैं तेरी गली के लोग,

हम ने दिल से तुझे सदा माना

hum ne dil se tujhe sada maana

हम ने दिल से तुझे सदा माना तू बड़ा था तुझे बड़ा माना, मीर ओ ग़ालिब के बाद

तेरे माथे पे जब तक बल रहा है

tere maathe pe jab tak bal raha hai

तेरे माथे पे जब तक बल रहा है उजाला आँख से ओझल रहा है, समाते क्या नज़र में

क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में

kya kya log guzar jaate hain rang birangi kaaro me

क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग बिरंगी कारों में दिल को थाम के रह जाते हैं दिल

हमें अब खो के कहता है मुझे तुम याद आते हो

hume ab kho ke kahta hai mujhe tum yaad aate ho

हमें अब खो के कहता है मुझे तुम याद आते हो किसी का हो के कहता है मुझे

महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं

maahtab sifat log yahan khaaq basar hain

महताब सिफ़त लोग यहाँ ख़ाक बसर हैं हम महव ए तमाशा ए सर ए राह गुज़र हैं, हसरत

जब कोई कली सेहन ए गुलिस्ताँ में खिली है

jab koi kali sehan e gulistan me khili hai

जब कोई कली सेहन ए गुलिस्ताँ में खिली है शबनम मेरी आँखों में वहीं तैर गई है, जिस