भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है

bhukmari kee zad me hai yaa daar ke saaye me hai

भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है अहले हिंदुस्तान अब तलवार के साये में

नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो

nilofar shabnam nahi angaar kee baaten karo

नीलोफ़र, शबनम नहीं, अँगार की बातें करो वक़्त के बदले हुए मेयार की बातें करो, भाप बन सकती

वामपंथी सोच का आयाम है नागार्जुन

vaampanthi soch ka aayaam hai nagarjun

वामपंथी सोच का आयाम है नागार्जुन ज़िंदगी में आस्था का नाम है नागार्जुन, ग्रामगंधी सर्जना, उसमें जुलाहे का

इंद्रधनुषी रंग में महकी हुई तहरीर है

indradhanushi rang me mahki hui tahrir hai

इंद्रधनुषी रंग में महकी हुई तहरीर है अमृता की शायरी एक बोलती तस्वीर है, टूटते रिश्तों की तल्ख़ी

जिसके सम्मोहन में पागल, धरती है, आकाश भी है

jiske sammohan me pagal dharti hai aakash bhi hai

जिसके सम्मोहन में पागल, धरती है, आकाश भी है एक पहेली सी से दुनिया, गल्प भी है, इतिहास

दोस्तो! अब और क्या तौहीन होगी रीश की

doston ab aur kya tauhin hogi reesh kee

दोस्तो! अब और क्या तौहीन होगी रीश की ब्रेसरी के हुक पे ठहरी चेतना रजनीश की, योग की

अचेतन मन में प्रज्ञा कल्पना की लौ जलाती है

achetan man me pragya kalpana ki lau jalaati hai

अचेतन मन में प्रज्ञा कल्पना की लौ जलाती है सहज अनुभूति के स्तर में कविता जन्म पाती है

ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! ये गिरानी देखिए

zindagi dushwaar hai uff ye giraani dekhiye

ज़िंदगी दुश्वार है उफ़! ये गिरानी देखिए और फिर नेताओं की शोला बयानी देखिए, भीख का लेकर कटोरा

ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है

ye samjhte hain khile hain to fir bikhrna hai

ये समझते हैं खिले हैं तो फिर बिखरना है पर अपने ख़ून से गुलशन में रंग भरना है,

ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था

khwab me koi mujh ko aas dilane baitha tha

ख़्वाब में कोई मुझ को आस दिलाने बैठा था जागा तो मैं ख़ुद अपने ही सिरहाने बैठा था,