हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है
हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है ये ज़िंदगी तो कोई इंतिक़ाम हो गई है,
Hindi Shayari
हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है ये ज़िंदगी तो कोई इंतिक़ाम हो गई है,
दिन को दिन रात को मैं रात न लिखने पाऊँ उनकी कोशिश है कि हालात न लिखने पाऊँ,
मैं जिस जगह भी रहूँगा वहीं पे आएगा मेरा सितारा किसी दिन ज़मीं पे आएगा, लकीर खींच के
ज़रा सी धूप ज़रा सी नमी के आने से मैं जी उठा हूँ ज़रा ताज़गी के आने से,
देख रहा है दरिया भी हैरानी से मैं ने कैसे पार किया आसानी से, नदी किनारे पहरों बैठा
हर घर में कोई तहख़ाना होता है तहख़ाने में एक अफ़्साना होता है, किसी पुरानी अलमारी के ख़ानों
हर किसी की है ज़बानी दोस्ती क्या किसी की आज़मानी दोस्ती, थे मुसाफ़िर दो अलग रस्तों के हम
लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर
कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया और कुछ तल्ख़ी ए हालात ने दिल तोड़ दिया,
अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें हम उन के लिए ज़िंदगानी लुटा दें, हर एक मोड़ पर