हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है

har ek saans hi hum par haram ho gayi hai

हर एक साँस ही हम पर हराम हो गई है ये ज़िंदगी तो कोई इंतिक़ाम हो गई है,

दिन को दिन रात को मैं रात न लिखने पाऊँ

din ko din raat ko main raat na likhne paaoon

दिन को दिन रात को मैं रात न लिखने पाऊँ उनकी कोशिश है कि हालात न लिखने पाऊँ,

मैं जिस जगह भी रहूँगा वहीं पे आएगा

main jis jagah bhi rahoonga wahi pe

मैं जिस जगह भी रहूँगा वहीं पे आएगा मेरा सितारा किसी दिन ज़मीं पे आएगा, लकीर खींच के

ज़रा सी धूप ज़रा सी नमी के आने से

zara see dhoop zara see nami ke aane se

ज़रा सी धूप ज़रा सी नमी के आने से मैं जी उठा हूँ ज़रा ताज़गी के आने से,

देख रहा है दरिया भी हैरानी से

dekh raha hai dariya bhi hairani se

देख रहा है दरिया भी हैरानी से मैं ने कैसे पार किया आसानी से, नदी किनारे पहरों बैठा

हर घर में कोई तहख़ाना होता है

har ghar me koi tahkhana hota hai

हर घर में कोई तहख़ाना होता है तहख़ाने में एक अफ़्साना होता है, किसी पुरानी अलमारी के ख़ानों

हर किसी की है ज़बानी दोस्ती

har kisi ki hai zabani dosti

हर किसी की है ज़बानी दोस्ती क्या किसी की आज़मानी दोस्ती, थे मुसाफ़िर दो अलग रस्तों के हम

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है

likh-likh-ke-aansoo

लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है, आख़िर

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया

Kuch to duniya ki

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया और कुछ तल्ख़ी ए हालात ने दिल तोड़ दिया,

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें

Agar hum kahe aur

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें हम उन के लिए ज़िंदगानी लुटा दें, हर एक मोड़ पर